mele me chudai- मेले के रंग सास, बहु, और ननद के संग

mele me chudai- मेले के रंग सास, बहु, और ननद के संग

प्रिय पाठकों, मेरा नाम वीणा है, उम्र २२ साल, फ़िगर ३४/२७/३५, रंग बहुत गोरा मैं अपना एक नया अनुभव पेश कर रही हूँ जो मेरे साथ तब हुआ जब मैं अपने मामा, मामी और कज़िन भाभी के साथ मेला देखने गई थी.

बात यूँ थी कि हमारे मामा का घर हाज़िपुर ज़िले मे था. ज़िल सोनपुर मे हर साल, माना हुआ मेला लगता है. हर साल की भांती इस साल भी मेला लगने वाला था. मामा का ख़त आया कि दीदी और वीणा बिटिया को भेज दो. हम लोग मेला देखने जायेंगे. यह लोग भी हमारे साथ मेला देख आयेंगे. पर पापा ने कहा कि तुम्हारी दीदी (यानी कि मेरी मम्मी) का आना तो मुश्किल है पर वीणा को तुम आकर ले जाओ, उसकी मेला घूमने की इच्छा भी है.

तो फिर मामा आये और मुझे अपने साथ ले गये. दो दिन हम मामा के घर रहे और फिर वहाँ से मै यानी कि वीणा, मेरे मामीजी, मामा और भाभी मीना (ममेरे भाई की पत्नी) और नौकर रामु, इत्यादि लोग मेले के लिये चल पड़े.

रविवार को हम सब मेला देखने निकल पड़े. हमारा कार्यक्रम ८ दिनों का था. सोनपुर मेले मे पहुँच कर देखा कि वहाँ रहने की जगह नही मिल रही थी. बहुत अधिक भीड़ थी.mele me chudai

मामा को याद आया कि उनके ही गाँव के रहने वाले एक दोस्त ने यहाँ पर घर बना लिया है. सो सोचा कि चलो उनके यहाँ चल कर देखा जाये. हम मामा के दोस्त यानी कि विश्वनाथजी के यहाँ चले गये. उन्होने तुरन्त हमारे रहने की व्यवस्था अपने घर के उपर के एक कमरे मे कर दी. इस समय विश्वनाथजी के अलावा घर पर कोई नही था. सब लोग गाँव मे अपने घर गये हुए थे. उन्होने अपना किचन भी खोल दिया, जिसमे खाने-पीने के बर्तनों की सुविधा थी.

वहाँ पहुँच कर सब लोगों ने खाना बनाया और विश्वनाथजी को भी बुला कर खिलाया. खाना खाने के बाद हम लोग आराम करने गये.

जब हम सब बैठे बातें कर रहे थे तो मैने देखा कि विश्वनाथजी की निगाहें बार-बार भाभी पर जा टिकती थी. और जब भी भाभी कि नज़र विश्वनाथजी कि नज़र से टकराती तो भाभी शर्मा जाती थी और अपनी नज़रें नीची कर लेती थी. दोपहर करीब २ बज़े हम लोग मेला देखने निकले. जब हम लोग मेले मे पहुँचे तो देख कि काफ़ी भीड़ थी और बहुत धक्का-मुक्की हो रही थी.mele me chudai

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